सियासत की बातें
बिहार.. . यहां सियासत की गलियों में जहां एक ओर सुशासन बाबू की कमियां नीत नए दिन सामने आ रही है तो वहीं दूसरी ओर नमो ने एक अलग ही हलचल पैदा कर रखी है।
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले - शायद प्रदेश बीजेपी ने यही महसूस किया होगा .. .जब 17 साल पुराना गठबंधन टूटा होगा। पर इससे अलग पार्टी को प्रदेश में फिर से नमो नाम का एक ऐसा चिराग हाथ लगा ... जिसके सहारे वो प्रदेश में पार्टी की विजयी पताखा फहराने को बेताब हैं। सैलानियों और बौद्ध भिक्षुओं का यह प्रदेश ........ इन दिनों रैलियों और बयानबाजी का केंद्र सा बन गया है।
पर सवाल ये कि आगामी लोकसभा चुनाव में नमो प्रदेश में कौन सा कार्ड वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करेंगे.……. क्योंकि उनकी टोपी से दूरी जगजाहिर है क्या ऐसे में वो हिन्दू ह्रदय सम्राट की छवि में परिवर्तन करना चाहेंगे या फिर अपने ही पुराने सहयोगी जदयू के अति पिछड़ा वोट बैंक में सेंधमारी ………क्योंकि जहाँ परम्परागत वोट बैंक उनके साथ है.… वहीं प्रदेश में बाढ़, सूखा, बिजली जैसी समस्याओं के साथ-साथ खुद के मंत्रियों द्वारा सरकार के खिलाफ बयानबाजी। ……. नीतीश सरकार की परेशानी का सबब और नरेन्द्र मोदी के पक्ष में लहर जरुर पैदा करती है ऐसे में उन्हें बल मिलना स्वभाविक है, पर यह कहना कि नमो के पक्ष में पूरी तरह लहर है कृत्रिम हैरानी की बात होगी क्योंकि यहां वोट बैंक का गणित कुछ और ही कहानी बयान करते है।
ऐसे में नमो कौन सा रुख अख्तियार करेंगे और सियासी नौका को सत्ता के उस पार तक कैसे ले जाएगे ……यह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि नेता का चुनाव आवाम के हाथों में है… और …वक्त इस बात की तस्दीक होगी कि जनता नमो का नमन करती है या फिर नमो स्वाहा ………
Dono mein se kisi ka chance nai hai iss bar
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